मैं मेरे नये दोस्तों को मेरा अपना परिचय करा दूं। मेरा नाम नेहा है, मेरी उमर 28 साल है, मेरी शादी हो चुकी है। मैं सेक्स की बहुत भूखी हूं। मेरे हबी राकेश बड़े स्मा…
मैं मेरे नये दोस्तों को मेरा अपना परिचय करा दूं। मेरा नाम नेहा है, मेरी उमर 28 साल है, मेरी शादी हो चुकी है। मैं सेक्स की बहुत भूखी हूं। मेरे हबी राकेश बड़े स्मार्ट और सेक्स में पावरफ़ुल हैं पर वो ज्यादातर समय बाहर ही गुजारते हैं और मुझमें सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है इसलिये मैं हर वक्त नये लंड की तलाश में रहती हूं। अपनी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि किस तरह मेरे ड्राइवर अमित ने मुझसे जबरदस्ती की थी।
आज मैं आपको अपनी एक नयी कहानी सुना रही हूं जिसमे मैंने और मेरी दोस्त (अब वो मेरी ननद है) सुमन ने किस तरह मनाली में चुदाई के साथ इनकम भी की। ये बात 1998 की है जब मैं और मेरी दोस्त चंडीगढ़ में बी ए के तीसरे साल की पढ़ाई कर रही थी। हम दोनों ही शुरु से चुदक्कड़ थी और अक्सर अपने ब्वायफ़्रेंड के साथ डेट पर जाती और चुदाई का मज़ा लेती। एक बार मैं अपने दोस्त के साथ शिमला घूमने के लिये गयी हुई थी। वहां पर हमने 3 दिन तक खूब चुदाई का नज़ारा लिया। वहां जिस होटल में हम रुके हुए थे वो होटल पर अक्सर काल गर्ल आती रहती थी और उस होटल में लगभग हर टूरिस्ट इसी लिये आता था।
मैं एक दिन शाम के वक्त बार टेबल पर बैठी थी मेरा दोस्त अभी रूम से नीचे नहीं आया था तभी एक सांवले रंग का मजबूत बदन का मर्द मेरे पास आ कर बैठ गया। उसने मुझे काल गर्ल समझ लिया था। मेरे पास आ कर उसने मुझे ड्रिंक की पेशकश की जिसे मैंने नम्रता से ठुकरा दिया। उसके बाद उसने स्माइल पास करते हुए मुझे से नाम पूछते हुए अपना परिचय देने लेगा। कुछ देर बाद उसने असली बात पर आते हुए मुझे रात की ओफ़र की और इसके लिये उसने बिना मेरी तरफ़ देखे सौ रुपये के काफ़ी सारे नोट मेरी तरफ़ बढ़ा दिये।
एक बार तो मैं उसकी हरकत पर हैरान हो गयी और मुझे गुस्सा भी आया पर दूसरे ही पल मेरे दिमाग में एक नया विचार आया (हालांकि मैं भी बहुत रिच फ़ैमिली से हूं पर जैसा कि सभी पाठक जानते हैं कोलेज लाइफ़ में पोकेट मनी की प्रोब्लम रहती है) कि ये तो पैसे के साथ मजा और नये लंड के साथ बाहर घूमने का बड़ा अच्छा साधन है। पर उस वक्त मैं अपने दोस्त के साथ थी। मैंने उसे अपना पता देते हुए बाद में सम्पर्क करने को कहा।
कई दिन के बाद मुझे उसका सन्देशा मिला कि उसे 2 लड़कियां 5 दिन के लिये चाहिये। वो और उसका दोस्त अपनी आउटिंग को इस बार रंगीन करना चाहते हैं। मेरे पूछने पर बताया की उन लोगों को मनाली के अन्दर अपना होलीडे बिताना है। मैंने उससे उसका कोन्टेक्ट नम्बर ले लिया और बोला कि मैं आपको कल तक बता दूंगी।
मैं तो उसी वक्त तैयार थी पर अब उसे दो लड़कियों की जरूरत थी जबकि मैं अकेली थी। तभी मेरे मन में सुमन का ख्याल आया। वैसे भी हम अकसर इकट्ठी चुदायी पर जाती थी।
पहले तो सुमन ने इन्कार कर दिया पर मेरे समझाने पर वो राजी हो गयी। मैंने उसी शाम उसको फोन करके रुपये और टाइम की सेटिंग कर ली। हम लोगों ने 5 दिन के उनसे 20000 रुपये मांगे। २ दिन के बाद हम मनाली के लिये निकल पड़े। अब हम दोनों बहुत खुश थे। एक तो हमे २-२ नये लंड मिलने वाले थे दूसरा हमें 20000/- रुपये भी मिलने वाले थे मनाली बसस्टेंड पर ही वो दोनों हमें मिल गये। हम दोनों उनके साथ कर पर चल पड़े। उन लोगों ने होटल पिकडेली में रूम ले रखा था। हमने रूम में पहुंचते ही उन्होने हमें नंगा होने को कहा और खुद फोन कर के वेटर को खाने का ओर्डर दे दिया।
हम लोगों ने पहले बाथ लेने की इच्छा जतायी। सन्जू (उनमें एक का नाम) ने कहा ठीक है परन्तु पहले कुछ खा लो। इतने में वेटर कोफ़ी और कुछ स्नैक्स ले आया। कोफ़ी लेने के बाद हम नहाने के लिये बाथरूम में चले गये। जैसे ही सुमन ने बाथरूम का गेट बंद करना चाहा तो उसे श्याम ने रोक दिया और कहने लगा, अब कोई शरम नहीं, दरवाजा खुला रहने दो हम देखना चाहते हैं कि तुम कैसे एक दूसरे को नहलाती हो। क्योंकि इस वक्त हम उनकी पेड सेक्स थी इसलिये चुप-चाप उनकी बात मानते हुए नंगी नहाने लेगी।
कुछ समय के बाद सन्जू और श्याम भी बाथरूम के अंदर आ गये। वो दोनों बिल्कुल नंगे थे। सन्जू बोला- इकट्ठे नहाएँ? मैंने उन्हें कहा- ओके। सन्जू ने श्याम से कहा- चलो हम चारों सब साथ साथ ही नहा लेते हैं, फिर चुदाई करेंगे! और हम सब बाथरूम में इकट्ठे नहाने लगे।
मैं सन्जू की तरफ़ देख कर मुस्कुरा रही थी। उसका खड़ा हुआ लंड देख कर मेरा हाथ अन्जाने में मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत में उसके सामने ही उंगली करने लगी। ये देख कर श्याम बोला- अरे तुम क्यों अपनी चूत में उंगली कर रही हो। तुम तो अपने हाथ से सन्जू के लंड का मजा लो और फिर जम कर चुदवाओ।
सन्जू ने तभी एक हाथ से मेरी चूचियों को मसलना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ की दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी अपने एक हाथ से उसके लम्बे और मोटे लंड को कस के पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। उसके लंड का सुपाड़ा काफ़ी बड़ा था और बिल्कुल काले रंग का था।
उधर सुमन और श्याम शोवर के नीचे एक दूसरे से चिपके हुए खड़े थे और सुमन श्याम के लंड को पकड़ कर खींच खींच कर हिला रही थी। श्याम एक हाथ से सुमन के दोनों नंगे चूतड़ों को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली से चोद रहा था।
मैंने भी सन्जू के तने हुए लंड को इतना चूसा कि उसके सुपाड़े से चिकना चिकना पानी निकलने लगा। हम दोनों वहीं बाथरूम फ़्लोर पर 69 के पोज में लेट गये। सन्जू की जीभ मेरी चूत में आग लगा रही थी। मैं सन्जू के लंड को हाथ से पकड़ कर खींच खींच के चूस रही थी। तभी सन्जू मेरे मुंह में ही झड़ गया। मैं तो उसके लंड से निकले डिस्चार्ज की मात्रा देख कर ही हैरान रह गई। काफी सारा सफ़ेद सफ़ेद गाढ़ा गाढ़ा माल उसके लंड से निकला जो मेरे मुंह में भर गया। मैं धीरे धीरे उस सारे खट्टे खट्टे माल को अपनी जीभ से चाट चाट कर पी गयी। इससे पहले मैंने जितने भी देखे थे उनके लंड से तो इसका करीब आधा माल ही निकलता है।
मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिये उसके झड़े हुए लम्बे लटकते हुए लंड को मैंने फिर से चूसना शुरु कर दिया। सन्जू अभी भी मेरी चूत चाटने में लगा था। मैं तो ये सोच कर मजे में बिल्कुल पागल सी हो गयी कि ये लंड आगले 5 दिन के लिये मेरे पास रहेगा।
जब सन्जू से नहीं रहा गया उसने मुझे वहीं बाथरूम के फ़्लोर पर कुतिया की तरह पोज बना कर बिठा दिया और मेरी दोनों टांगे फैला कर पीछे से मेरी चूत में अपना ८ इंच लम्बा और ४ इंच मोटा गधे जैसा लंड पेल दिया और एक जोरदार धक्का लगाया। मेरी चूत चुदने के लिये बिल्कुल गीली हो कर इतना खुल गयी थी कि एक ही धक्के में सन्जू का पूरा लंड गपक गयी। उसके धक्कों में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं भी अपने चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत में उसके लंड के धक्कों का मजा लेने लगी। दो तीन धक्कों में ही मेरी चूत फच फच करने लगी।
चार पांच धक्कों में ही मैं झड़ गयी। लेकिन सन्जू के लम्बे लंड के धक्के जारी थे और उसके बाद तो मैंने पहली बार मल्टीपल ओर्गास्म का मतलब जाना क्योंकि हर दूसरे धक्के पर मेरी चूत पानी छोड़ रही थी। मुझे सन्जू से चुदाने में बहुत मजा आ रहा था कि मैं सिसकारियां भर रही थी, मैं एक्साइटमेंट में कई बार बोल भी पड़ी- मुझे और जोर से चोदो। पूरा लंड पेल दो। हाय, मेरी चूत फाड़ डालो।
करीब मुझे 15 मिनट तक सन्जू ने कई सारे पोज में कभी आगे से, कभी पीछे से, कभी खड़े खड़े और कभी अपने लंड पर बिठा कर वहीं पर श्याम और सुमन के सामने चोदा और मेरी चूत में अपना सारा माल एक बार फिर से निकाल दिया। हम दोनों अब थक कर अलग हो गये। मेरी चूत से सन्जू का सारा माल निकल निकल कर मेरी जांघों पर टपक रहा था।
सन्जू अभी भी मेरी चूचियां मसल रहा था। उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला हो कर चमक रहा था और गधे के लंड की तरह नीचे लटक गया था।
कुछ समय के बाद मैं फिर से गर्म हो गयी। मैंने फिर से सन्जू के लंड को चूसना शुरु कर दिया। सन्जू भी मेरी चूत में उंगली डाल डाल कर और निकाल कर उंगली में लगे मेरे और उसके झड़े हुए माल को चाटने लगा। इतने जोर से झड़ कर भी मेरी चुदास शान्त नहीं हुई थी और मेरा मन कर रहा था कि मैं सारी रात सन्जू के उस मोटे और लम्बे लंड से मजे लेती रहूं।
तभी हम सभी बाथरूम से बाहर आ गये सन्जू का गधे जैसा लम्बा लंड चलते समय उसकी दोनों टांगों के बीच लटका हुआ ऐसे मस्ताना हो कर झूल रहा था कि मैं उसके लंड पर से नजर हटा ही नहीं पा रही थी। मैं अभी भी सन्जू के लटकते हुए लंड को देख रही थी।
उसके बाद तो फिर 5 रातों तक हम चारों एक ही कमरे में सारी बत्तियां जला कर एक ही बिस्तर पर अलग अलग स्ताइल से एक-दूसरे को चोदते। वो 5 रातों में मैंने जी भर कर ऐसी चुदाई करवाई कि मैं जीवन भर कभी भूल नहीं सकती।
आखिरी रात को सन्जू के उस लम्बे लंड से मैं पता नहीं कितनी बार झड़ी। श्याम ने भी मेरी चूत और मुंह में पता नहीं कितनी पिचकारियां मारी होंगी। मेरी चूत को तो 5 दिन के बाद उसके लंड ने खुला भोसड़ा बना दिया था।
आखिरी दिन जब हम जब वो दोनों जाने लगे तब भी मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फिर से एक आखिरी बार सन्जू के लंड को चूस चूस कर इतना गर्म कर दिया कि वो मेरे मुंह में ही झड़ गया। उसका सारा सफ़ेद माल पी कर मैंने उसको बुझते हुए दिल से गुड बाय कहा।
हमें जाते वक्त उन्होंने 20000/- से अलग 2000/- और भी दिये और साथ में ब्रा-पैंटी के इम्पोरटेड सेट भी दिये।
अब चंडीगढ़ वापस आने के बाद हम दोनों उस रात की बात जरूर करते हैं और दोनों ही उत्तेजित हो कर एक दूसरे के साथ लेस्बियन करती। सन्जू का गधे जैसा मोटा और लम्बा लंड अभी भी आंखों के सामने आ जाता है।
— Antarvasna3

Real experience jaisa laga padh kar.
Bohot real lagi ye story, dil khush ho gaya.
Bahut hi natural lagi kahani, jaise sach mein ho raha ho.
Mast story thi, aur bhi aise likhte raho.
Ekdum zabardast! Maine ek hi saans mein padh li.
Bohot real lagi ye story, dil khush ho gaya.
Author ne bahut mehnat se likha hai, samajh aa raha hai.
Real experience jaisa laga padh kar.
Ekdum zabardast! Maine ek hi saans mein padh li.
Story short thi par impact bahut zyada tha.
Kya baat hai bhai, itni achi kahani bahut din baad padhi.
Bhot hi sundar likha hai, dil se maza aaya.
Ye kahani padh kar bahut accha laga, keep it up.
First time is site pe aaya, ab roz aaunga.
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Aur stories bhi daalo is topic pe please.
Sach mein dil ko chu gayi ye kahani.