हाय दोस्तों मैं यानि संदीप एक कॉल बॉय फिर आपको अपनी कहानी पढ़ने के लिए प्रेरित करता हूँ …Antarvasna
हाय दोस्तों मैं यानि संदीप एक कॉल बॉय फिर आपको अपनी कहानी पढ़ने के लिए प्रेरित करता हूँ …Antarvasna
मेरा कद ६.१ इंच का है और बॉडी भी ठीक है … लण्ड का साइज़ ६.५ है …Antarvasna
मुझे लड़कियों की चोदाई में बहुत ही मज़ा आता है …
जैसा कि पहले भी मैंने अपने बारे में बताया था कि मैं दक्षिणी दिल्ली में साकेत पीवीआर एरिया में रहता हूँ … मुझे मेरी पहली कहानी ( मैं एक कॉल बॉय हूँ ) का बहुत ही अच्छा रेस्पोंस मिला …
अब मुझे अपनी कहानी लिखनी चाहिए …Antarvasna
बात ऐसी है कि एक दिन मैं अपने किसी काम की वजह से जा रहा था। मैंने बस पकड़ी रूट नम्बर ४६३ मेहरौली से ओखला की। साली बस तो कम थी क़यामत ज्यादा थी। जब मैं उस बस में चढ़ा तो मैंने देखा कि बस में इतनी भीड़ थी की पूछो मत। मैंने बड़ी मु्श्किल के एक कोना पकड़ा और उसे पकड़ कर खड़ा रहा कि कब यह सब भोसड़ी के उतरेंगे और मुझे थोड़ा आराम मिलेगा … साली रंडी की बीज बस भी तो बहुत ही धीरे चल रही थी।
तभी अचानक बस रुकी और स्टाप पे से बिहारी और मजदूर लोग चढ़ने लगे। उन में कुछ औरतें भी थीं। उन औरतों में एक औरत ऐसी थी कि देख कर किसी का भी टल्ली हो जाए .. मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया। फिर अचानक बस खानपुर वाले स्टाप पर रुकी और और भरने लगी तभी उन मजदूर लोगों में से एक बूढ़ी औरत ने उस औरत को मेरे पास खड़े होने को कहा। मुझे अचानक कुछ महसूस होने लगा तो वो उसकी चिकनी गांड का कमाल था। उस औरत ने शायद लाल रंग की पैंटी पहन रखी थी। मैंने अपनी जांघ उसकी गांड से टकरा दी। एक बार तो मैं डर ही गया कि कहीं बस वाले मुझ देख न लें … लेकिन ऐसा हुआ नही !
फिर मैंने धीरे धीरे उसकी गांड का मज़ा लेना शुरू कर दिया। क्या गांड थी उसकी। मैं यह बात ज्यादा सोच रहा था कि वो महिला मुझे रोक क्यूँ नहीं रही थी। भोसड़ी की पूरा मजा दे रही थी और ले भी रही थी। फिर क्या था मैंने धीरे से अपने आप को संभाल कर सीधा किया और उसकी गांड का छेद ढूँढने लगा। जैसे ही मैं सीधा हुआ उन सभी लोगों ने मेरी तरफ़ देखा। तो मैं डर गया और वापस अपने पुरानी वाली पोसिशन में आ गया। लेकिन उस औरत को यह बात पसंद नही आई और ख़ुद ही इस पोसिशन में हो गई कि मुझे उसकी गांड का छेद आसानी से दिख जाए। मैंने धीरे धीरे से उसकी गांड की तरफ़ हाथ बढ़ाया और मजा लेने लगा। फिर उसे क्या हुआ उसने अपनी गांड को इतनी जोर से पीछे किया कि मेरे लण्ड पर उसकी वार हुआ।
फिर क्या था मैंने बस में ही उसकी गांड मारनी शुरू कर दी … यारो क्या मजा था उस बस का। मेरा लण्ड धीरे धीरे उसकी गांड में उसकी पैंटी को चीरता हुआ जाने लगा था और वोह औरत धीरे धीरे मजा ले रही थी। जब मेरा झड़ने को आया तो मैंने उसकी गांड मारनी बंद कर दी। ऐसा होता देख उस औरत ने मेरी तरफ़ अजीब सी नजरों से देखा लेकिन मैंने उसे कहा कि मेरा स्टाप आ गया है और मुझे अब उतरना है। तो उस औरत ने मुझे एक प्यारी सी मुस्कान दी। और उसके बाद उसने मुझे अपने इशारों में ही कह दिया था कि उसका मज़ा भी अब पूरा हो गया था यानि की वो बस में ही झड़ गई थी।
मैं अब भी उस जैसी औरत की प्यास बुझाने के लिए उस नम्बर की बस में सफर कर लेता हूँ …
तो दोस्तों यह कैसी लगी मेरी कहानी ? … भगवान् आपका भला करेगा … हा हा हा

Sach mein dil ko chu gayi ye kahani.
Kya baat hai bhai, itni achi kahani bahut din baad padhi.
Ekdum zabardast! Maine ek hi saans mein padh li.
Bohot real lagi ye story, dil khush ho gaya.
Bhai tumhari likhne ki style alag hi level ki hai.
Story bahut acchi thi, likhne ka andaz kamaal hai.
Kamaal ka likha hai, mann khush ho gaya.
Ekdum zabardast! Maine ek hi saans mein padh li.
Waah kya likhte ho yaar, next part jaldi dalo.
Bahut hi umda kahani thi, thanks for sharing.
Author ne bahut mehnat se likha hai, samajh aa raha hai.