दोस्तों अंतरवासना पर यह मेरी पहली कहानी है मेरा नाम विकास है और मैं इंदौर का रहने वाला हूं। अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए मैं अपनी आपबीती सुनाता हूं।
दोस्तों अंतरवासना पर यह मेरी पहली कहानी है मेरा नाम विकास है और मैं इंदौर का रहने वाला हूं। अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए मैं अपनी आपबीती सुनाता हूं।
बात आज से ५ साल पुरानी है जब मैं बी . इ . करने मंदसौर गया था। मैंने मंदसौर के बारे में सुना था कि यहाँ २ नम्बर के बहुत काम होते हैं पर जब मैं वहाँ पहुँचा तो दो और चीज पता चली कि यहाँ हर घर में रांड बस्ती है और यहां के पानी में बहुत सेक्स है। मेरा पहला सेमेस्टर खत्म हो चुका था और मेरे बहुत से दोस्त भी बन गये थे उनमें से ३ कुछ बहुत अच्छे दोस्त बन गये थे जो कि अगले सेमेस्टर में मेरे रूम पार्टनर बन गये और हमने एक कोलोनी में एक बंगला किराये पर लिया इस कोलोनी की एक बात बहुत खास थी कि सभी बंगलों कि छत आपस में मिली हुई थी और सभी बंगलों पर टावर बना हुआ था जिससे कोई भी किसी के भी घर में जा सकता था।
पर जब हम उस कोलोनी में रहने गये तो उसके एक दो बंगले छोड़ सभी खाली थे क्योंकि अभी कोलोनी बन ही रही थी। करीब २ महीने बाद पड़ोस के बंगले में एक फ़ैमिली ट्रांसफ़र होके रहने आई। अच्छे पड़ोसी की तरह हमने उनका सामान उतरवाया और बंगले में रखवाया। शाम को उन्होंने हमें चाय नाश्ते पर बुलाया तो पता चला उनकी फ़ैमिली में अंकल, आंटी और उनकी एक १९ साल की लड़की थी अंकल, आंटी दोनो डोक्टर थे लड़की का नाम रुचि जैन था उसकी हाइट ५’७” थी बूब्स थे ३२ साइज़ के एक दम कड़क और तने हुए बड़ी गांड और दूध जैसी गोरी और चेहरा एक दम मासूम और आंखों में सेक्स भरा हुआ था। मैंने जब पहली बार उसे देखा तो देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं उसे चोदने के बारे में सोचने लगा वो १२ वीं कर चुकी थी और घर पर ही रहकर पी एम् टी की तैयारी कर रही थी।
थोड़े दिनो में ही में उन लोगों की दिनचर्या पता लगा ली अंकल आंटी दिन भर होस्पिटल में रहते हैं और शाम को अपनी क्लीनिक चले जाते हैं मतलब रुचि शुबह १० बजे से रात ९ बजे तक घर में अकेली रहती थी। मैं सोचने लगा रुचि से बातचीत कैसे करूं? एक दिन मेरी किस्मत खुल गयी मैं मार्केट से आ रहा था कि मैंने देखा रुचि अपनी गाड़ी में धक्का लगा रही थी मैंने पूछा क्या हुआ तो वो बोली गाड़ी पंचर हो गई है पर आज संडे है इसलिये दुकान बंद है मैने कहा गाड़ी मेरे दोस्त के घर पर रख कर आप मेरे साथ घर चलो पहले उसने मना करा पर अपनी मजबूरी को देखते हुए तैयार हो गई मैने उसकी गाड़ी अपने एक दोस्त के घर रखी और उसे अपनी गाड़ी पर बैठा लिया और धीरे धीरे गाड़ी चलाने लगा
तभी मुझे एक आइडिया आया मैंने ब्रेक लगाया तो वो मुझसे टकराई और उसके बूब्स मुझसे टकराये तो वो थोड़ा सम्भल कर बैठ गई और बोली ये क्या कर रहे हो मैंने बोला गड्ढे बहुत हैं फिर तो रास्ते भर मैंने ब्रेक लगाता गया और वो मुझसे टकराती रही मेरा लंड खड़ा हो गया था। जब हम घर पहुंचे तो वो गाड़ी से उतरी और मुझे गुस्से से घूरते हुए थैंक्स बोल कर चली गई। मुझे लगा मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी। दूसरे दिन मैंने उसकी गाड़ी ठीक करवा कर ले आया और जान बूझकर १० के बाद उसके घर गया ताकि घर पर उसके अलावा कोई नहीं हो। जब मैंने डोर बेल बजाई तो रुचि ने दरवाजा खोला वो जींस और टी शर्ट पहने हुए थी और गजब लग रही थी वो मुझे देखकर चौंक गई मैंने उसे गाड़ी की चाबी दी तो उसने गुस्से से चाबी ली और थैंक्स कहा और मुझे बाहर ही रुकने का कहकर अंदर पैसे लेने चली गई।
मैंने सोचा साली बहुत भाव खा रही है तो मैं बगैर पैसे लिए ही वापस चला आया और ४-५ दिनों मैंने उसे देखकर अनदेखा करने लागा तभी एक दिन सुबह मैं अपने बंगले की छत पर पढ़ने गया जैसे ही मै छत पर पहुंचा तो देखा रुचि भी छत पर पढ़ रही है और मुझे देख रही हे मैं वापस नीचे आ गया करीब आधे घंटे बाद रुचि हमारी छत से उतर कर नीचे आई और सीधे मेरे कमरे में आई मैं उसे देखकर चुओंक गया। उसने मुझसे कहा आप उस दिन बगैर पैसे लिए ही आ गये थे कितने पैसे हुए मैने कहा १० रुपए उसने मुझे पैसे दिये जाने लगी।
मैंने उसे रोका और छेडते हुए कहा हमारे घर अगर कोई आता है तो हम उसे कम से कम पानी तो पिलाते हैं इसलिए रुकिये पानी पीके जाना वो घबरा गई मैंने उसे पानी पिलाया और कहा क्या आप चाय पियेंगी वो बोली नहीं आप तकलीफ मत कीजिये मैंने कहा इसमें तकलीफ की क्या बात है मैं अपने लिये तो बना ही रहा हूँ आप भी पीकर जाइये वो बोली ठीक है। मैंने किचन में जाकर चाय बना लाया हम दोनो ने चाय पी और बात करने लगे तभी वो बोली “आइए एम सोरी” आपने उसदिन मुझे लिफ़्ट दी और मेरी गाड़ी सुधरवाई और मैंने आपको चाय पानी तो दूर आपको अंदर आने को भी नहीं कहा मैंने कहा इट इज़ आल राइट मैं सोचने लगा फस गई रजिया गुंडो में। उसकी चुन्नी गले में लिपटी हुई थी इसलिये बार बार मेरी नज़र उसके बूब्स पर जा रही थी और मेरा लंड खड़ा हो गया था। वो बोली अच्छा अब मैं चलती हूँ और वो चली गई उस दिन मैंने ३ बार उसके नाम की मुठ मारी और रात भर वो मेरे सपनों में मुझसे चुदवाती रही। अब मैं दिन रात उसे चोदने के सपने देखने लगा और सोचने लगा कैसे उसे पटाऊं।
अब अक्सर मैं उसे बात करने के बहाने ढूंढने लगा और अक्सर जब वो छत पर पढ़ने जाती तो मैं भी अपनी किताब लेकर छत पर पहुंच जाता अब उसे भी मुझसे बात करना अच्छा लगने लगा था और रोज हमारी घंटों बातें होने लगी पर मेरी उसे कुछ करने की कभी हिम्मत नहीं हुई। अब हमरी फोने पर भी बातें होने लगी एक दिन हिम्मत करके मैंने उसे आई लव यू बोल दिया वो चौंक गई और एक दम से गुस्सा हो गयी और मुझ पर चिल्लाने लगी कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसा कहने की, आज के बाद मुझसे बात मत करना और चली गई। मैने सोचा साली नखरे दिखा रही है २ -४ बार बोलूंगा तो मान जाएगी पर वो तो और नखरे दिखाने लगी और मुझे धमकी देने लगी कि अगर आज के बाद फोन करा तो पापा मम्मी से बोल दुंगी।
मैंने सोचा चलो छोड़ो किसी और को पटा लेंगे चुदाई तो करनी है पर अफसोस भी था कि इतना अच्छा माल हाथ से चला गया। अब हमारी बात बंद हो गई थी और कुछ दिनों के बाद सेमेस्टर ब्रेक में इंदौर आ गया और इंदौर में गर्लफ़्रेंड की खूब चुदाई की १ महीने बाद मैं वापस मंदसौर गया। अब तक रुचि मेरे दिमाग से उतर चुकी थी अब मैं कोलेज में अपनी नयी जूनियर को पटाने में लगा था और घर सिर्फ़ सोने के लिये ही आने लगा और रुचि को देखता भी नहीं था एक दिन मैं छत पर गया तो देखा रुचि भी छत पर ही खड़ी है मैं वापस नीचे आ गया थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल पर एक फोन आया मैंने नम्बर देखा तो मैं चौंक गया नम्बर रुचि का था। कुत्ते दिमाग में एक आइडिया आया मैंने फोन काट दिया थोड़ी देर बाद फिर फोन आया मैंने फिर काट दिया और सोचने लगा अबके बार फोन उठा लूँगा मेरी किस्मत फिर गांडू निकली फोन नहीं आया मैं खुद को गाली देने लगा कि फोन क्यों नहीं उठाया।
दूसरे दिन जब मैं कोलेज जाने लगा तो मुझे रुचि के पापा ने आवाज देकर बुलाया मेरी तो गांड ही फट गई मैं डरते हुए उनके पास गया तो वो बोले बेटा मेरा एक काम कर दो प्लीज़ आज पी एम् टी के फ़ोर्म मिलने की आखरी तरीख है और मुझे झरूरी काम से बाहर जाना है प्लीज़ तुम रुचि का फ़ोर्म दिला दो और रुचि को भी साथ ले जाओ लड़कियों की लाइन कम रहती है रुची भी वहीं खड़ी थी तो मैंने थोड़ा नाटक दिखाया फिर तैयार हो गया। रुचि मेरी गाड़ी पर बैठ गई और हम फ़ोर्म लेने चल दिये रास्ते भर हमारी कोई बात नहीं हुई और न ही मैंने कोई ब्रेक लगाया। मैं सोचने लगा पहले मैं नहीं बोलूंगा। करीब दो घंटे लाइन में लगने के बाद हमें फ़ोर्म मिल गया हम वापस घर आ गये पर हमने कोई बात नही की।
मैंने उसे २ बजे घर छोड़ा और जाने लगा तब उसके घर पर कोई नहीं था तब वो बोली पानी तो पी लो मैंने कहा नो थैंक्स और अपने घर चला गया १५ मिनट बाद मैं चाय के लिये दूध लेने के लिये बाहर निकला तो देखा रुचि धूप मैं बाहर ही बैठी थी। मैंने पूछा तो बोली मैं अपनी चाबी ले जाना भूल गई थी और पापा मम्मी अपनी चाबी रतलाम ले गये हैं मैंने सोचा यही सही टाइम है और बोला यहाँ कब तक बैठोगी, चलो मेरे घर चलो और बैठो मैं दूध लेकर आता हूँ। मेरे घर पर कोई भी नहीं था मेरे रूम पार्टनर आशीष, अनुज, प्रतीक कोलेज गये हुए थे और ६:३० – ७:०० बजे तक। वो मेरे घर पर चली गई थोड़ी देर में मैं दूध लेकर आ गया। मैंने उसे पानी दिया और चाय बनाने चला गया थोड़ी देर बाद मैं चाय बना लाया। हम दोनो ने चाय पी और मैंने खाना लगा लिया क्यों कि सुबह से हम दोनो ने ही कुछ नहीं खाया था मैं मन ही मन सोचने लगा इस बार मैं कुछ नहीं करुंगा। मैंने उसे कहा तुम इस कमरे में आराम कर लो। मैं दूसरे कमरे में हूँ।
मैं दूसरे कमरे जाकर लेट गया और रुचि को कैसे चोदुं सोचने लगा तभी रुचि कमरे में आयी और मेरे पास आकर बैठ गई मैं भी उठ कर बैठ गया और पूछा क्या हुआ तब वो रोते हुए बोली विकास क्या अपन दोनो अच्छे दोस्त नहीं रह सकते हैं। मैं तुम से बात करे बगैर नहीं रह सकती मैंने सोचा अब फसी और बोला प्लीज़ रुचि मैंने बड़ी मुश्किल से अपने दिल को समझाया है, प्लीज मुझसे ऐसी बात मत करो अगर मैं तुमसे बात करता रहा तो मैं तुम्हें भुला नहीं पाउंगा और मैं कुछ कर बैठूँगा इसलिये प्लीज़ मुझसे अब कोई भी रिश्ता मत बनाओ। वो जोर जोर से रोने लगी और बोली क्या वाकई तुम मुझसे इतना प्यार करते हो, मैं भी रोने का नाटक करने लगा और बोला अपनी जान से भी ज्यादा वो मुझसे लिपट गई और बोली “आई लव यू टू जान”।
इन २ महीनो में मुझे पता चला कि मैं भी तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती आई लव यू। मैं मन ही मन सोचने लगा मैं इस मक्खन मलाई आइटम को पटक कर चोद दूं पर फिर सोचा जल्दी करने से माल हाथ से निकल भी सकता है थोड़ा इन्तज़ार कर। वो मुझसे चिपक कर रो रही थी तभी मैंने उसका सिर पकड़ कर उसके माथे पर एक किस किया और बोला आई लव यू जान और फिर उसके होंठों पर किस कर दिया वो शरमा गई। मैंने फिर से उसके होंठों को पकड़ के किस किया और चूसने लगा वो भी अब मेरे होंठ चूसने लगी और बोली आई लव यू जान। मैंने धीरे से अपनी जुबान उसके मुँह में डाल दी और वो उसे भी चूसने लगी और अपनी जुबान मेरे मुँह में डाल दी। मैं भी उसकी जुबान चूसने लगा
अब वो गरम होने लगी थी। मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया और एक हाथ उसके बूब्स पर रख कर उसे दबाने लगा और उसकी जीभ चूसता रहा वो और गरम होने लगी मैंने धीरे से एक हाथ उसकी कुर्ती में डाला और ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा वो सिस्कारियां लेने लगी तभी मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और दोनो कबुतरों को आज़ाद कर दिया और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा वो बहुत गरम हो चुकी और जोर जोर से सिस्कारियां ले रही थी और मेरे सर पर हाथ फेर रही थी और होंठ चूस रही थी। मौके की नज़ाकत को समझते हुए मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा
वो मदहोश होने लगी और उसकी आंखें बंद होने लगी मैंने उसकी कुर्ती और ब्रा उतार दी और उसके बूब्स चूसने लगा और धीरे से उसका नाड़ा खोल दिया और पयज़ामा उतार दिया वो बस सिस्करियां ले रही थी। मैंने उसकी चड्ढी भी उतार दी। वो भी अब मेरे कपड़े उतारने लगी मैंने फटाफट अपने सारे कपड़े उतार दिये और उसकी चूत पर हाथ रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में डाल दी वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हथों से मेरा लंड टटोलने लगी मेरा लंड पूरे जोश में आ गया था और पूरा खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था वो मेरा लंड पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये वो तिलमिला उठी, उसकी चूत एक दम गुलाबी रखी थी और चूत पर एक भी बाल नहीं थे, उसकी चूत एक दम लाल सुर्ख हो गई थी ऐसी इच्छा हो रही थी कि उसकी चूत खा जाऊं।
मैं ६९ की पोजीशन में आ गया। उसने मेरा लंड पकड़ा और मुँह में लेकर चूसने लगी तबी वो काँपने लगी और उसने अपने चूत का पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया तभी मेरा लंड अकड़ गया और मैंने सारा पानी उसके मुँह में छोड़ दिया, वो भी मेरा सारा पानी पी गयी हम वैसे ही नंगे लेटे रहे थोड़ी देर बाद बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने उसकी टांग चौड़ी की और उसके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा वो फिर सिस्करियां भरने लगी। मैंने धीरे से अपना ९” और ३” मोटा लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुसा दिया वो चिल्लाने लगी “प्लीज़ धीरे करो, मैं मर जाउंगी”। मैंने धीरे से उसे प्यार से सहलाने लगा और उसके बूब्स चूसने लगा और वो सिस्कारियां भरने लगी और उसका दर्द भी कम हो गया। मैंने फिर जोर से एक झटका मारा और ३’ लंड अंदर घुस गया उसकी आंख से आंसू निकल आये थे। मैं फिर रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा और एक जोर के झटके के साथ पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया वो जोर से चिल्लायी “मर गई”। मैं बोला अब दर्द नहीं होगा मजा आयेगा। जब थोड़ी देर में वो नोर्मल हो गई तब मैं धीरे धीरे लंड आगे पीछे करने लगा।
अब उसका दर्द भी खत्म हो गया था और वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर हिलाने लगी, उसकी चूत में से खून बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और उसकी शील मैंने तोड़ी है। उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरा लंड बहुत मोटा इस लिए बहुत मजा आ रहा था और हम एक दूसरे में पूरे तरीके से समा गए थे। वो जोर जोर से अपने पुट्ठे हिला रही थी और मैं तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था। करिब १ घंटे की चुदाई में वो ३ बार झड़ चुकी थी और एक बार और झड़ने वाली थी तभी हम दोनो एक साथ अकड़ गये। एक साथ जोर जोर से धक्के मारने लगे और एक दूसरे में झड़ गये और सातवें आसमान पर पहुंच गये। उसे दिन हमने ३ बार और चुदाई की और ये सिलसिला ३ साल तक चला। फिर मैं इंदौर आ गया।
आप लोगों को मेरी ये आपबीती कैसी लगी प्लीज़ मुझे बतायें
— Antarvasna Sex Stories

Sach mein dil ko chu gayi ye kahani.
Yeh site meri favorite ban gayi hai, roz naye stories padhta hoon.
Itni lambi kahani bhi bore nahi hui, likhne ka talent hai aapme.
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Bahut hi umda kahani thi, thanks for sharing.
Kya twist tha kahani mein, maza aa gaya.
Ekdum zabardast! Maine ek hi saans mein padh li.
Kya baat hai bhai, itni achi kahani bahut din baad padhi.
Sahi likha hai, next part ka wait rahega.
Sahi likha hai, next part ka wait rahega.
Ye story mere dost ne bheji thi, ab main bhi fan ho gaya.